बुद्ध पूर्णिमा 
May 8, 2020 • गुरुकुल वाणी

आज के ही दिन वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा कहते हैं। आज के ही दिन सिद्धार्थ गौतम का लुम्बिनी मे जो अब नेपाल मे है, मे जन्म हुआ था। आज के ही दिन वैशाख पूर्णिमा को सिद्धार्थ गौतम को बोध गया (बिहार) मे ज्ञान प्राप्त हुआ था और वे सिद्धार्थ गौतम से तथागत बुद्ध बने। आज के ही दिन वैशाख पूर्णिमा को तथागत बुद्ध का कुशीनगर मे महापरिनिर्वाण हुआ था। सम्राट अशोक ने इन तीनों जगहों पर धम्मेक स्तूप बनवाया।

बौद्ध धर्म दुनियाँ का अनोखा धर्म है, जो भारत में उत्पन्न हुआ, पूरे विश्व मे फैला, फूला, और फला, चाहे सम्राट अशोक का युग रहा हो, कनिष्क, हर्ष वर्धन या बौद्ध पाल का शासन युग रहा हो, भारत सोने की चिड़िया कहलाया, और जब - जब जाति या वर्ण वादी - कट्टर पंथियों का शासनकाल रहा, भारत गुलाम बना ! बौद्ध धर्म भारत को छोड़ कर दूसरे देशों में फैला, फूला और फला, 24 देशों का राष्ट्रीय धर्म बना और इसके प्रचार-प्रसार के लिये ऐक बूँद भी रक्त नहीँ बहा। इसका कारण है कि बौद्ध धर्म-त्याग, करुणा, दया, भाईचारा और मेत्री का धर्म है ! बौद्ध धर्म की विशेषता है कि यह विज्ञान सम्मत धर्म है, ज्ञान, चिंतन की इसमें प्रधानता है ! - बौद्ध धर्म वर्ण, जाति, ऊंच नीच-छूआ छूत आदि सामाजिक बुराइओ से दूर है। दुनियाँ के बैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया है कि बुद्ध और उनका धर्म ही इस कराहती हुई मानवता को बचा सकता है और विनाश की औऱ बढ़ रहे संसार की रक्षा कर सकता है ! बौद्ध विकसित देश जापान इसका जीता - जागता उदहारण है ! भारत इससे सबक ले !

तथागत बुद्ध ने विश्व को अनित्य अनात्म और दुख का दर्शन दिया। अनित्य के सिधान्त से उन्होने नियतिवाद, आत्मा, परमात्मा को नकार दिया। दुख का कारण उन्होने तृष्णा को बताया और तृष्णा से मुक्ति हेतु अष्टांगिक मार्ग दिया। 

एक बार पुनः सभी बौद्ध उपासकों एवं उपासिकाओं को बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं.....!!!

राजेश मोदनवाल