*हिंदी यात्रा साहित्य के जनक थे महापंडित सांकृत्यायन*
April 9, 2020 • गुरुकुल वाणी


*जन्म जयंति पर सादर नमन*


हिंदी में राहुल सांकृत्यायन जैसा विद्वान, घुमक्कड़ व महापंडित की उपाधि से स्मरण किया जाने वाला कोई अन्य साहित्यकार नही मिलेगा। *हिन्दी यात्रा साहित्य का जनक* माने जाने वाले *राहुल सांकृत्यायन* एक प्रतिष्ठित बहुभाषाविद थे। 20 वी सदी के पूर्वार्ध में इन्होंने यात्रा वृतांत तथा विश्व दर्शन के क्षेत्र में साहित्यिक योगदान दिये। *वौद्ध धर्म* पर इनका शोध हिंदी साहित्य में युगान्तकारी माना जाता है, जिसके लिये इन्होंने तिब्बत से लेकर श्रीलंका तक भ्रमण किया था।

*महापंडित राहुल सांकृत्यायन* हिंदी साहित्य की अद्वतीय विभूति हैं।इन्होंने हिंदी भाषा और साहित्य की बहुमुखी सेवा की ।इनका साहित्य सृजन विराट था। ये हिंदी साहित्य के समर्थ्य साहित्यकार थे। शुक्ल युग एंव शुक्लोत्तर युग में विपुल साहित्य सृजन करके हिंदी साहित्य जगत को अपनी प्रतिभा से आलोकित करने वाले महान साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन को उनके वयापक एंव बहुविध ज्ञान के कारण *महापंडित* कहा जाता है। हिंदी साहित्य में गौरवपूर्ण स्थान पर प्रतिष्ठित इस साहित्यकार का *आज जन्मदिवस* है।
राहुल जी का जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के *पंदहा* नामक गांव में नाना राम शरण पाठक के घर *9अप्रैल1893ई०* को हुआ। इनके पिता *गोबर्धन पाण्डेय* *कैनल* गांव में रहते थे। जो कट्टर धर्मनिष्ठ ब्राह्मण थे। इनकी माता *कुलवंती देवी* सरल एंव उदार हृदय की सात्विक विचार वाली महिला थीं। राहुल जी के बचपन का नाम *केदारनाथ* था।संस्कृति गोत्र होने के नाते *सांकृत्यायन* कहलाये। *बौद्ध धर्म* में आस्था रखने के कारण अपना नाम बदलकर राहुल रख लिए।

राहुल जी वास्तव में ज्ञान के लिये गहरे असंतोष में थे, इसी असंतोष को पूरा करने के लिये हमेशा तत्पर रहे। इन्होंने मात्र हिंदी साहित्य के लिए ही नही बल्कि *भारत* के कई अन्य क्षेत्रों के लिये भी शोध कार्य किये। राहुल जी सचमुच बहुमुखी प्रतिभा के धनी और संपन्न विचारक थे। *धर्म* *दर्शन* *लोक साहित्य* *यात्रा साहित्य* *इतिहास* *राजनीति* *जीवनी* *प्राचीन ग्रंथों* का संपादन कर विविध क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य किये। इनकी रचनाओं में प्राचीन के प्रति आस्था, इतिहास के प्रति गौरव और वर्तमान के प्रति सधी हुई दृष्टि का समन्वय देखने को मिलता है।

एक *कर्मयोगी योद्धा* के तरह राहुल सांकृत्यायन ने बिहार के किसान आंदोलन में भी प्रमुख भूमिका निभाई।सन 1940 ई० के दौरान किसान आंदोलन के सिलसिले में उन्हें एक वर्ष की जेल हुयी। *देवली* कैम्प के इस जेल प्रवास के दौरान इन्होंने *दर्शन दिग्दर्शन* ग्रंथ की रचना कर डाली। 1942 ई०के भारत छोड़ो आंदोलन के बाद जेल से निष्काषित होने पर उस समय के किसान आंदोलन के शीर्ष नेता *स्वामी सहजा नन्द* सरस्वती द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक पत्र *हुंकार* का इन्हें संपादक बनाया गया।ब्रिटिश सरकार ने *फुट डालोऔर राज करो* की नीति अपनाते हुए गैर कांग्रेसी पत्र पत्रिकाओं में चार अंको हेतु *गुंडो से लड़िये* शीर्षक एक विज्ञापन जारी किया।इसमें एक व्यक्ति गांधी टोपी व जवाहर बंडी पहने आग लगाते दिखाया गया था। राहुल जी ने इस विज्ञापन को छापने से इनकार कर दिया पर विज्ञापन की मोटी धनराशि देखकर स्वामी सहजानन्द ने इसे छापने पर जोर दिया जिसपर राहुल जी ने अपने को पत्रिका संपादन से अलग कर लिया।

राहुल सांकृत्यायन का मूल मंत्र घुमक्कड़ी यानी गतिशीलता रही है। घुमक्कड़ी इनके लिये वृति नही वरन धर्म था। इनकी मृत्यु 14 अप्रैल 1963 ई० को दार्जलिंग में हो गयी।

                                   -रवीश पाण्डेय