*विखरे ख्वाब*
June 23, 2020 • गुरुकुल वाणी

मैंने तुम्हें चाहा यह मेरी खता थी
तुमने भी तो चाहा क्या वह तेरी वफा थी
वादे करने वाले तेरे वादे कहां गए
टूट कर चाहने वाले तेरी चाहते कहां गए
मैं तो मर कर के भी जी लूंगी
प्यार करने की जो भूल की मैंने
तेरी बाहों में मरने की तमन्ना है
गर तुम आ जाते हैं
मेरी तमन्ना पूरी हो जाती 
न जाने क्यों तेरी यादों की साए रह रह कर पुकारती है
दिल के करीब रहकर इतनी दूर चले गए
तेरे गम में डूबी रही और समझ भी ना पाई
चाहत की रीत भी अजीब है
जिसने भी इस में डूबा डूबते ही चला गया
ना प्यार मिली न मंजिले
पागलों की तरह दौड़ते रहे
आखिर कब तक
आखिर कब तक
आखिर कब तक

बीना मिश्रा
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