अर्जक संघ एक मानवतावादी विचारधारा : सन्‍तोष कुशवाहा
June 28, 2020 • गुरुकुल वाणी

अर्जक संघ की स्थापना 1 जून 1968 को उत्तर प्रदेश  में महामना रामस्वरूप वर्मा ने अपने सहयोगी महामना चौधरी महाराज सिंह भारती एवं अन्य साथियों के साथ मिलकर की थी ।

यह एक विशाल औरों से हटकर सामाजिक संघठन है। अर्जक संघ जीवन जीने की पद्धत्ति है। अर्जक संघ मानववादी संस्कृति का विकास करने का काम करता है।इसका मकसद मानव में समता का विकास करना, ऊंच-नीच के भेदभाव को दूर करना और सबकी उन्नति के लिए काम करना है। संघ 14 मानवतावादी त्योहार मनाता है। इनमें गणतंत्र दिवस, आंबेडकर जयंती, बुद्ध जयंती, स्वतंत्रता दिवस के अलावा बिरसा मुंडा और पेरियार रामास्वामी की पुण्यतिथियां भी शामिल हैं।अर्जक संघ का दर्शन और उसकी विचारधारा बेजोड़ है, अकाट्य है। यह पदार्थवाद एवं मानव समता पर आधारित है।

अर्जक संघ के अनुयायी सनातन विचारधारा के उलट जीवन में सिर्फ दो संस्कार ही मानते हैं- विवाह और मृत्यु संस्कार। शादी के लिए परंपरागत रस्में नहीं निभाई जातीं। लड़का-लड़की संघ की पहले से तय प्रतिज्ञा को दोहराते हैं और एक-दूसरे को वरमाला पहनाकर शादी के बंधन में बंध जाते हैं।

मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार मुखाग्नि या दफना-कर पूरा किया जाता है, लेकिन बाकी धार्मिक कर्मकांड इसमें नहीं होते। इसके 5 या 7 दिन बाद सिर्फ एक शोकसभा होती है। अर्जक संघ के मुताबिक,  हिंदू समाज में जन्म के आधार पर बहुत ही ज्यादा भेदभाव किया गया है। कोई पैदा होते ही ब्राह्मण, तो कोई वाल्मीकि होता है। ब्राह्मण समाज धर्मग्रंथों का सहारा लेकर सदियों से नीची जातियों का दमन करते आए हैं।

अर्जक विचारधारा के महानपुरुष रामस्वरूप वर्मा जी सिर्फ राजनेता ही नहीं थे, बल्कि एक उच्चकोटि के दार्शनिक, चिंतक और रचनाकार भी थे। उन्होंने कई महत्वपूर्ण पुस्तकों की रचना की है। क्रांति क्यों और कैसे, मानववाद बनाम ब्राह्मणवाद, मानववाद प्रश्नोत्तरी, ब्राह्मणवाद महिमा क्यों और कैसे, अछूतों की समस्या और समाधान, आंबेडकर साहित्य की जब्ती और बहाली, निरादर कैसे मिटे, शोषित समाज दल का सिद्धांत, अर्जक संघ का सिद्धांत, वैवाहिक कुरीतियां और आदर्श विवाह पद्धति, आत्मा पुनर्जन्म मिथ्या, मानव समता कैसे, मनुस्मृति राष्ट्र का कलंक आदि उनकी प्रमुख रचनाएं हैं। इन किताबों को पढ़ कर लोग तार्किक होते हैं ।

अर्जक संघ द्विज परंपराओं को चुनौती दे रहा है और बहुजन समाज इसमें शरीक हो रहा है। अर्जक परंपराएं बहुजन समाज के लोगों में इसलिए लोकप्रिय हो रही हैं क्योंकि इसमें पाखंड नहीं है।अर्जक परंपरा में महिलाओं को विशेष स्थान है। अंत्येष्टि कार्यक्रम में भी वे शामिल होती हैं।अर्जक परंपरा में जितना महत्व बेटों का है उतना ही महत्व बेटियों का भी है।