देव रूपी भगवान थे श्री परशुराम सोहनाग मे आज भी   होती हैं पूजा : शिवाकांत तिवारी
April 25, 2020 • गुरुकुल वाणी

देवभूमी देवरिया मे अक्षय तृतिया  को आज भी मेला लगता है भगवान परशुराम का प्राचीन मंदिर होने के नाते सोहनाग मंदिर की महीमा आज भी प्रसिद्ध है यहा की महिमा का वर्णन यह है की चर्म रोग जीसको  होता है यहा के पोखरे  मे स्नान करने मात्र से लोग ठीक हो जाते है सलेमपुर का सोहनाग  मार्ग को इसकी  महत्ता को देखकर देवनगर सलेमपुर के मुख्य मार्ग को क्षेत्र  के लोगो ने भगवान श्री परशुराम चौंक बनाये जाने की लोगो ने माँग की भगवान परशुराम की महीमा का वर्णन किया है जो प्रमुखता से लेख मे दर्शाया गया है।

परशुराम त्रेता युग (रामायण काल) में एक ब्राह्मण ऋषि के यहां जन्मे थे। जो विष्णु का छठा अवतार है। पौरोणिक वृत्तान्तों के अनुसार उनका जन्म महर्षि भृगु के पुत्र महर्षि जमदग्नि द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप पत्नी रेणुका के गर्भ से वैशाख शुक्ल तृतीया को मध्यप्रदेश के इंदौर जिला में ग्राम मानपुर के जानापाव पर्वत में हुआ था। वे भगवान विष्णु के आवेशावतार थे।

पितामह भृगु द्वारा सम्पन्न नामकरण संस्कार के अनन्तर राम कहलाए। वे जमदग्नि का पुत्र होने के कारण जामदग्न्य और शिवजी द्वारा प्रदत्त परशु धारण किये रहने के कारण वे परशुराम कहलाये। आरम्भिक शिक्षा महर्षि विश्वामित्र एवं ऋचीक के आश्रम में प्राप्त होने के साथ ही महर्षि ऋचीक से शार्ङ्ग नामक दिव्य वैष्णव धनुष और ब्रह्मर्षि कश्यप से विधिवत अविनाशी वैष्णव मन्त्र प्राप्त हुआ। तदनन्तर कैलाश गिरिश्रृंग पर स्थित भगवान शंकर के आश्रम में विद्या प्राप्त कर विशिष्ट दिव्यास्त्र विद्युदभि नामक परशु प्राप्त किया। शिवजी से उन्हें श्रीकृष्ण का त्रैलोक्य विजय कवच, स्तवराज स्तोत्र एवं मन्त्र कल्पतरु भी प्राप्त हुए। चक्रतीर्थ में किये कठिन तप से प्रसन्न हो भगवान विष्णु ने उन्हें त्रेता में रामावतार होने पर तेजोहरण के उपरान्त कल्पान्त पर्यन्त तपस्यारत भूलोक पर रहने का वर दिया।

कारोना के वजह से लोग इस वर्ष अपने घर से ही भगवान श्री परशुराम की जयंती मना रहे है। जिसमे जयंती मनाने मे अभिषेक त्रिगुनायक नैनी, प्रियेश त्रिपाठी लार, अभीमन्यू  पांडेय, सुनील पांडेय, सलेंमपुर, रविश पांडेय, गुमटही, डाo धर्मेन्द्र पांडेय, बभनोंली पांडेय, मुन्ना जी, नारायण शुक्ल, श्री बंशिधर शुक्ल गुरूजी सोहनाग परिवार,  वेदसागर पांडेय धमोंली, इन्द्रजीत मिश्र जी,  कस्बा सलेमपुर गजानन मिश्र पीपरा रामधर, प्रभाकर दूबे, डोलछपरा दामोंदर दूबे, ठेंगवल दूबे, रतनेश मिश्रा, मझोंली, अभीनित उपाध्याय, मनिहारी, नवीन तिवारी मिश्रोंली, बिनय तिवारी, राजन  तिवारी,  डूमवालिया, अरविंद मिश्र श्रीनगर, प्रेमसंकर प्रधान धधवार, देवेश पांडेय,  बिशनपुरा, आदि लोगो ने जयंती पर ध्यान लगाकर पूजा अर्चना की।