गरीबी और संघर्शो के दम पर राजनिती के शिखर पर है भारत देश के  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी - शिवाकांत  तिवारी
May 26, 2020 • गुरुकुल वाणी


गरीबी और संघर्ष से भरा बचपन

17 सितम्बर 1950 को वड़नगर में दामोदरदास मूलचंद मोदी के घर जन्में नरेंद्र मोदी उनकी 6 संतानों में तीसरे पुत्र थे। नरेंद्र मोदी अपने पिता के साथ रेलवे स्टेशन पर चाय का स्टॉल लगाते थे। उन्हें पढने का बहुत शौक था। उनके शिक्षक के अनुसार वे कुशल वक्ता थे। मोदी ने वडनगर के एक स्कूल से पढाई पूरी की थी। जसोदा बेन से 13 वर्ष में सगाई और 17 वर्ष की उम्र में शादी हो गयी थी। 1980 में गुजरात के विश्वविद्यालय से राजनिति विज्ञान में ग्रेजुएशन पूरा किया। शादी के कुछ वर्षों बाद मोदी ने संन्यास लेकर घर का त्याग कर दिया और ज्ञान की तलाश में हिमालय पर चले गए। कई वर्षों के भ्रमण और ज्ञान तपस्या के बाद मोदी फिर से सांसारिक जीवन में लौटे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए। इसके बाद उन्होंने देश के कई राज्यों में संघ की जिम्मेदारियां निभाई। संघ द्वारा उन्हें भारतीय जनता पार्टी में भेजा गया जहां उन्होंने पार्टी संगठन को खड़ा करने में बड़ी भूमिका निभाई।

गुजरात के 14वें मुख्यमंत्री बने

गुजरात लौटने के बाद वे 1970 में अहमदाबाद चले गए। 1971 में वह आरएसएस के लिए पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए। 1975 में देश भर में आपातकाल की स्थिति के दौरान उन्हें कुछ समय के लिए छिपना पड़ा। 1985 में वे बीजेपी से जुड़े और 2001 तक पार्टी पदानुक्रम के भीतर कई पदों पर कार्य किया, जहाँ से वे धीरे धीरे वे सचिव के पद पर पहुंचे। वर्ष 2001 में वे अपने गृह राज्य गुजरात के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में चार गौरवपूर्ण कार्यकाल पूरे किए। उन्होंने विनाशकारी भूकंप के दुष्प्रभावों से जूझ रहे गुजरात को विकास रुपी इंजन के रूप में परिवर्तित कर दिया जो आज भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

पहली बार भाजपा को पूर्ण बहुमत, देश के 15वें प्रधानमंत्री


2014 के आम चुनावों में अपनी पार्टी को महाविजय दिलाने के बाद नरेन्द्र मोदी ने 26 मई 2014 को भारत के 15वें प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। वे भारत के प्रथम प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म आजादी के बाद हुआ है। ऊर्जावान, समर्पित एवं दृढ़ निश्चय वाले नरेन्द्र मोदी एक अरब से अधिक भारतीयों की आकांक्षाओं और आशाओं के प्रतीक हैं। नरेन्द्र मोदी की विदेश नीति से संबंधित विभिन्न पहल में विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की वैश्विक मंच पर वास्तविक क्षमता एवं भूमिका की छाप दिखती है। उन्होंने सभी सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति में अपने कार्यकाल की शुरुआत की। संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए उनके भाषण की दुनिया भर में प्रशंसा हुई।