घमवा में चलेलें मजुरवा...
May 20, 2020 • गुरुकुल वाणी

घमवा में चलेलें मजुरवा
कहँवा बा सरकार ।
घमवा में चलेलें मजुरवा...

१.
जेठ दुपहरिया, भइल अन्हियरिया 
पीठि पर लरिका बा सिर पे गठरिया 
खुलल बा जम के दुआर ।
घमवा में चलेलें मजुरवा 
कहँवा बा सरकार...

२.
अइलें जहजिया से ले के महामारी
बड़े-बड़े मनई, धनिक, ब्यौपारी
छापेलें कुल्हि अखबार ।
घमवा में चलेलें मजुरवा
कहँवा बा सरकार...

३.
हमरे लहू से लिखल संबिधनवा
समता, नेयाव के बान्हल बचनवा
कहँवा बा ऊहे नेयाव !
रहिया में पूछेलें मजुरवा 
कहँवा बा सरकार...

४.
महल-दुमहला आ पुलवा बनवलीं
बगियन-बगियन फुलवा खिलवलीं ।
पिठिया उठवलीं पहाड़
हँसुआ चलवलीं कुदार 
घमवा में मरेलें मजुरवा
कहँवा बा सरकार ...

५.
अन्न उगवलीं आ मिलिया चलवलीं
नगर-नगर के पहिया घुमवलीं
देखलीं मों  सपना हज़ार ।
घमवा में जरेलें मजुरवा 
कहँवा बा सरकार ...
.
६. 
देहिं सिहराइल, गोड़ थहराइल
लरिकन के मुहँवा पियराइल ।
जिनगी परलि बा खभार
घमवा में चलेलें मजुरवा
कहँवा बा सरकार ....

७.
जेकरे हुनरवा हो जेकरे जँगरवा
चमके बजरिया, चलेला संसरवा 
ओहि के दिहलऽ बिसार ।
घमवा में सोचेलें मजुरवा
कहँवा बा सरकार ....

८.
जेठ दुपहरिया, भइल अन्हियरिया 
पीठि पर लरिका बा सिर पे गठरिया 
खुलल बा जम के दुआर ।
घमवा में चलेलें मजुरवा 
कहँवा बा सरकार...

Dhirendar Nath
१७/मई/२०२०