इन्सानियत अभी जिन्‍दा है : सरफराज
April 25, 2020 • गुरुकुल वाणी

कानपुर के बाबूपुरवा इलाके में एक ठौ गांव है मुंशीपुरवा. मुंशीपुरवा कोरोना संक्रमण का हॉटस्पॉट है. मुंशीपुरवा में रहते हैं डॉ. बिन्नी. डॉ बिन्नी के भाई हैं भरत उर्फ डब्लू. डब्लू की सास उन्हीं के साथ रहती थीं. बीमार रहती थीं. बुधवार को उनका देहांत हो गया. 

घर पर डॉ. बिन्नी, उनका बेटा और भाई तीन लोग ही मौजूद थे. डाक साब को चिंता हुई कि दाह संस्कार कैसे होगा? कोई रिश्तेदार भी नहीं आ सकता. मुस्लिम पड़ोसियों ने कहा कि सब हो जाएगा, हम सब हैं न! चिंता काहे की?

परिवार के साथ पड़ोसियों ने राम नाम सत्य कहते हुए अर्थी को कंधा दिया, श्मशान ले गए और संस्कार किया. शरीफ, बबलू, इमरान, आफाक, उमर, जुगनू, भूलू, लतीफ, नौशाद, तौफीक आदि शामिल हुए और दो फुट की दूरी बनाए रखने का पालन किया. राम नाम सत्य है... की गूंज के साथ अर्थी निकली. भरत ने बताया है कि इलाके में कई हिंदू परिवार भी रहते हैं लेकिन कोरोना के डर से कोई नहीं आया.

पत्रकार लिख रहा है कि हिंदू मुसलमानों को एक साथ शवयात्रा में जाते देख लोग अपनी आंखों से आंसू नहीं रोक सके.

सीन कट. अब चलते हैं छावनी. 

कानपुर के ही छावनी क्षेत्र में रहने वाले कौशल प्रसाद का देहांत हो गया. बुजुर्ग थे. कौशल प्रसाद रिक्शा चलाकर गुजारा करते थे. पत्नी का निधन पहले ही हो गया था. उनके बेटे संतोष की भी मृत्यु हो चुकी है. बेटी कमलेश्वरी की शादी सीतापुर में हुई है. गुरुवार को कौशल प्रसाद का निधन हुआ तो इस कोरोना काल में बेटी भी सीतापुर से नहीं आ सकी. कौशल प्रसाद को कंधा देने वाला कोई नहीं था. 

लेकिन इलाके के हिंदू-मुस्लिम दोनों आ खड़े हुए. राधेश्याम, असलम, मोहम्मद सुहानी, अजमत उल्लाह, रामत कलाम, ज्ञानू, मुन्ना, मोहम्मद कलाम, भूरे आदि ने मिलकर कंधा दिया. राम नाम सत्य कहते हुए कौशल प्रसाद को श्मशान ले गए और रीति रिवाज के मुताबिक अंतिम संस्कार किया. 

समाज में कुछ लोग तन मन धन से आग लगाने की कोशिश करते रहते हैं, लेकिन मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि समाज सुरक्षित है. एक दूसरे पर भरोसा रखें. किसी के कहने पर किसी से नफरत न करें.
साभार कृष्ण कांत*