इन्सानियत और कोरोना : सरफराज
April 25, 2020 • गुरुकुल वाणी

तमिलनाडु के त्रिचि शहर के एक कस्बे में  रहने वाली  गरीब परिवार की महिला को प्रसव पीड़ा होती है ।
महिला का पति सरकारी एम्बुलेंस से उसे लेकर 7 किलोमीटर दूर अस्पताल जाता है।
अस्पताल में डॉक्टर उसे ऑपरेशन से बच्चा होने की सलाह देते है साथ ही कुछ जटिलताओं की वजह से 1 यूनिट खून की आवश्यकता बताते है।
अस्पताल में लॉक डाउन होने की वजह से महिला के ग्रुप का खून उपलब्ध नही था । 
अंततः महिला और उसका पति अपने घर वापस लौटने के लिए निकल पड़ते है ताकि किसी रिश्तेदार को खून देने के लिए बुला सके।
 ऐसे माहौल में जब गाड़ियां भी नही मिल रही थी और ये दंपति हैरान परेशान सड़को पर भटक रहे थे तभी एक पुलिस कांस्टेबल ने उन्हें आवाज देकर उन्हें अपने पास बुलाया ।
नकी समस्या सुनकर उसने पहले उनके लिए कुछ भोजन का प्रबंध किया और एक टैक्सी का प्रबंध करने में लग गया । 
दंपति से बातों के क्रम में उस पुलिस वाले को उनकी समस्या का पता चला । उसने महिला से उसका ब्लड ग्रुप पूछा । 
जानने के बाद वो बोला कि उसका ब्लड ग्रुप भी वही है जो महिला का है, लिहाजा वो अपना खून उसे दे देगा ।
इसके बाद वो 23 वर्षीय पुलिस कांस्टेबल उस दंपति को वापस अस्पताल लेकर गया और अपना खून डोनेट किया ।
ऑपरेशन के बाद महिला ने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया और जच्चा- बच्चा दोनों स्वस्थ है।
लेकिन कहानी में एक ट्विस्ट अभी बाकी था।
 त्रिचि के SP  ने सारा मामला जानकर उस कांस्टेबल को 1 हजार रुपये देकर पुरस्कृत किया। 
मामला ऊपर जाने के बाद में तमिलनाडु के DGP ने भी उस कांस्टेबल को 10 हजार रुपये देकर पुरस्कृत किया।
उस कांस्टेबल ने इनाम के पूरे 11 हजार रुपये उस महिला को दे दिए।उस महिला का नाम सुलोचना है और पुलिस कांस्टेबल का नाम एस सैयद अबू ताहिर।
साभार  सीमा यादव