K B P G College, मिर्ज़ापुर को नाहीद आबिदी पर गर्व है
April 22, 2020 • गुरुकुल वाणी


नाहीद आबिदी को 2014 में साहित्य में उनके अमूल्य योगदान के लिए *पद्मश्री पुरस्कार* से नवाजा गया था। मिर्ज़ापुर के एक जमींदार परिवार से ताल्लुक रखने वाली नाहीद आबिदी ने K B P G College से संस्कृत में M. A. किया। उनका परिवार वासली गंज स्थित गफ़ूर खां की गली में रहता है। उनका विवाह बनारस के मशहूर वकील जनाब एहतेशाम आबिदी से हुआ। विवाह के बाद उन्होंने 1993 में काशी विद्यापीठ, बनारस से Ph. D. की डिग्री प्राप्त की। शोध का विषय था *" वैदिक साहित्य में अश्वनियों का स्वरूप "*।

शोध के बाद उन्होंने अपनी साहित्यिक यात्रा की नई मंजिल चुनी- *वैदिक और इस्लामिक संस्कृति के मेल जोल का अध्ययन*। इस यात्रा के पहले पड़ाव के रूप में उनकी जो  किताब आयी उसका उन्वान है " *संस्कृत साहित्य में रहीम* "। इस किताब में प्रसिद्ध मध्यकालीन कवि अब्दुल रहीम खान-ए-खानाँ के संस्कृत भाषा के प्रति लगाव पर प्रकाश डाला गया है। उनकी दूसरी किताब है " *देवालस्य दीपः* "। ये पुस्तक ऊर्दू और फ़ारसी के महान कवि मिर्ज़ा असदुल्ला खाँ ग़ालिब की किताब " *चराग-ए-दैर " का संस्कृत अनुवाद है*। 

आबिदी के अध्ययन और अनुवाद का दायरा दारा शिकोह तक फैला है। शाहजहाँ का बड़ा पुत्र दारा शिकोह सोलहवीं शताब्दी में कई वर्षों तक बनारस में रहा। काशी के पंडितों से संस्कृत सीखा। फिर उपनिषदों और वेदांत का फ़ारसी में तर्जुमा किया। उपनिषदों के फ़ारसी तर्जुमे का नाम है सिर्र-ए-अकबर। दारा शिकोह के काम को  नाहीद आबिदी आगे बढ़ाने में लगी रही हैं। सिर्र-ए-अकबर के हिंदी अनुवाद का काम भी आबिदी के नाम के साथ जुड़ा है।

आबिदी की मेधा ने तत्कालीन राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम  को भी प्रभावित किया और कलाम साहब ने 2007 में उन्हें राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया था। डॉ. कर्ण सिंह ने भी वैदिक साहित्य पर किये गए उनके शोध की भूरि भूरि प्रशंसा की है।

अपनी साहित्यिक यात्रा का पूरा श्रेय वो अपने मायके और ससुराल दोनो को देती हैं। उनका कहना है कि हमारा परिवार हमेशा से खुले विचारों और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को मानने वाला रहा है।

बनारस में उनके घर का अध्ययन कक्ष वैदिक एवं इस्लामिक साहित्य से जुड़ी दुर्लभ किताबों से भरा है। 

उनके पास सौ से अधिक वर्ष पुरानी एक हस्तलिखित किताब है जो भागवत पुराण का उर्दू अनुवाद है। ये किताब 1903 से उनके परिवार की धरोहर है।

K B P G College को नाहीद आबिदी पर गर्व है ।

*शरद महरोत्रा*