कोरोना वायरस से पीड़ितो की जांच के पीछे का विज्ञान
April 3, 2020 • गुरुकुल वाणी

कोरोना वायरस सीरीज लेख संख्या-2

-भारत के IGIB नामक संस्था जो कि CSIR की दिल्ली स्थित जीव विज्ञान से संबंधित शोध करती है, उसके एक वैज्ञानिक डॉ सौवीक मैती एवं डॉ देबोज्योति चक्रवर्ती एवं उनकी टीम ने एक सरल, सुगम एवं सस्ती जांच पद्धति विकसित किया है। आइये इसके बारे में थोड़ा विस्तार से जाने।

-उपरोक्त वैज्ञानिकों ने एक तकनीकी का इस्तेमाल किया है जिसे Crisper Cas 9 कहते है। इस तकनीकी में मुख्यतः दो हिस्से होते हैं। एक हिस्सा गाइड आरएनए को रखता है और दूसरा हिस्सा जो लक्ष्य होता है उससे बंधने का। इनमे गाइड आरएनए की भूमिका महत्वपूर्ण होती है क्योंकि यही लक्ष्य आरएनए अर्थात वायरस के आरएनए से बंधेगा। 

-सबसे पहले मरीज के विभिन्न स्रोत जैसे नाक, खून, गले इत्यादि से सैंपल लेके उसमे से वायरस को अलग किया जाता है। तत्पश्चात वायरस से आरएनए को निकाल लिया जाता है। फिर उस आरएनए से डीएनए का निर्माण किया जाता है। इस क्रिया में  पीसीआर नाम की तकनीकी का इस्तेमाल किया जाता है। जब एक बार वायरस के आरएनए से डीएनए की बहुत सारी प्रतिलिपियाँ बन जाती है तब उसे एक विशेष प्रकार के कागज़ पे लगाया जाता है। वैज्ञानिकों ने इसे ऐसा स्वरूप दिया है जैसे कि प्रेगनेंसी टेस्ट किट में होता है। डीएनए वाले सोलुशन को जब इसमे डाला जाएगा तो दो लाइन्स बनेंगी जिससे यह निश्चय किया जा सकेगा कि वास्तव में उस व्यक्ति को संक्रमण है अथवा नही। IGIB के वैज्ञानिकों ने इस तकनीकी को पेटेंट कराने के लिए एवं मान्यता के सक्षम संस्थाओं के संपर्क में हैं।

-एक दूसरा टेस्ट का तरीका जो आजकल लैब्स में अपनाया जा रहा है वो है रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन बेस्ड पीसीआर। इस तकनीकि में मरीज के सैंपल में से निकले गए वायरस से आरएनए को निकाला जाता है। तत्पश्चात ऐसे छोटे डीएनए के टुडे जिन्हें प्राइमर कहते है और वो वायरस विशिष्ट होते है, उनकी उपस्थिति में पीसीआर का रिएक्शन करते है। यदि कोई हिस्सा अम्प्लीफाय  करता है अर्थात उसकी कई सारी कॉपियां बन जाती है तो उस मरीज को कोरोना पोसिटिव कहा जाता है।

-हालांकि यह टेक्नोलॉजी पहले से ही प्रयोग में है, परंतु कोविड 19 के लिए विशिष्ट प्राइमर बनाना और उसे एक किट के रूप में प्रस्तुत करने का कार्य, उसकी टेस्टिंग और पीसीआर के बाद के सुरक्षा इत्यादि की टेस्टिंग मीनल भोसले नाम के वैज्ञानिक ने जो एक प्राइवेट कंपनी माय लैब की कर्मचारी है, उन्होंने किया। इस रियल टाइम पीसीआर टेक्नोलॉजी की सहायता से वायरल लोड अर्थात सैंपल में वायरस की संख्या को भी जाना जा सकता है। मीनल द्वारा बनाया गया किट देश मे निर्मित पहला किट है और एन आई वी (National Institute of Virology) द्वारा प्रमाणित है।

डॉ. विनय कुमार बरनवाल
सहायक प्राध्यापक
वनस्पति विज्ञान विभाग
स्वामी देवानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय
मठ लार, देवरिया