महात्मा ज्योतिराव फुले : मिठाई लाल भारती
April 12, 2020 • गुरुकुल वाणी

ब्राह्मणों की बारात में अपमानित होने के पश्चात ज्योतिराव के मन को बड़ी ठेस लगी। घर जाकर दुःखी मन से पिता को घटना की सारी बातें बताई। किंतु पिता से भी कोई सांत्वना नहीं मिली। वे दुःखी मन से रोते हुए पूना में मूलामूठा नदी के किनारे बैठकर सोचने लगे कि मुझमें क्या कमी थी जिसके कारण मुझे अपमानित किया गया। इसी बीच गाँव की कुछ शूद्र औरतें नदी से पानी लेकर लौट रहीं थीं , वे फुले को रोता हुआ देखकर हँसने लगीं। फुले ने देखा कि इन औरतों के मुँह में हांडी बंधी है। इनके ज़बान होते हुए भी बोल नहीं सकती।ये मुझे रोता देख हँस रहीं हैं। इन्हें मानसम्मान और ग़ुलामी का एहसास  नहीं है। ज्योतिराव  को समझ में आ गया कि ग़ुलामी और लाचारी का कारण  “अज्ञानता “ है। ग़ुलामों को जब ग़ुलामी का एहसास होता है तो वह हँसता नही ,बल्कि रोता है। मुझे आज मेरे अपमानित किए जाने का कारण समझ आ गया जिससे मैं रो रहा हूँ। उनको बड़ा झटका लगा और ग़ुलामी से मुक्ति का संकल्प लिया। 

सबसे पहले स्वयं की अज्ञानता को दूर करने के लिए शिक्षित होने के साथ ही साथ अपनी पत्नी को भी शिक्षित करने का प्रण लिया। उनकी सोच थी- “यदि एक पुरुष शिक्षित होता है तो वह अकेला शिक्षित होता है, यदि एक स्त्री शिक्षित होती है तो पूरा समाज शिक्षित होता है”। सबसे पहले उन्होंने शूद्रों, अतिशुद्रों के बच्चों को शिक्षित करने के लिए उनके परम सहयोगी “फारूक शेख़“ की मदद से एक स्कूल खोला। तत्कालीन सनातनी ब्राह्मणों ने फुले को यह कहकर बदनाम और धमकी देना शुरू कर दिया कि फुले धर्म के विरूद्ध काम कर रहा है। उनको जान से मारने का भी प्रयास किया गया किंतु उन्होंने हिम्मत नही हारी और लोगों को जागृत और शिक्षित करने का कार्य जारी रखा।  कुछ ही दिनो में फ़ारूख शेख़ की बहन “ फ़ातिमा शेख़” के साथ उनके सहयोग से फुले की पत्नी सावित्रीबाई फुले ने बालिकाओं को भी शिक्षित करने के लिए एक स्कूल की स्थापना की। भारत में यह शिक्षा स्थल प्रथम स्त्रीशिच्छा केंद्र एवं प्रथम महिला शिक्छिका  होने का गौरव प्राप्त है। 

महात्मा ज्योतिराव फुले का यह सामाजिक परिवर्तन का आंदोलन "Rebuff & Reform“ झटका लगने के बाद आंदोलन के नाम से हमें आत्मसम्मान के लिए संघर्ष एवं अज्ञानता को समाप्त करने के लिए प्रेरित करता है। इस अवसर पर हम महात्मा फुले के सामाजिक परिवर्तन के आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए कृतसंकल्प हैं।  
महात्मा फुले को शत-शत नमन के साथ उनके जन्मदिन की बधाई।