ऑन लाइन क्लास बनाम प्राइवेट स्कूल : श्रीधर मिश्रा
July 21, 2020 • गुरुकुल वाणी


कोरोना के चलते प्राइवेट स्कूल ऑन लाइन क्लास चला रहे हैं, बच्चे दिन भर एंड्रॉइड फोन पर क्लास वर्क व होम वर्क कर रहे, ये वही स्कूल हैं जिनके परिसर में यदि कोई बच्चा छुप छुपा कर अपने अभिभावक का फोन लेकर कभी पहुंच गया तो उसे पनिशमेंट मिलता ही था गार्जियन बुलाकर फटकारे जाते थे कि लापरवाही की हद है इत्ता सा बच्चा मोबाइल कैसे टच किया व स्कूल तक कैरी किया यह है आपकी केयरनेसनेस, एक्सक्यूज के बाद एक फाइन पेपर भी हैंडओवर होता था कि ये फाइन काउंटर पर जमा कर दीजिए और आगे से केयर कीजिये बच्चा फोन टच तक नही करपाये
    अब वे ही स्कूल बकायदे फोन पर ऑन लाइन क्लास ही नही अटेंडेंस ले रहे, अब गार्जियन यह नही पूछ पा रहे कि बच्चा भी वही है स्कूल भी वही है फोन भी वही है तो फिर फोन टच करने की ही नही बल्कि उसी से पढ़ने की इजाजत कैसे मिल रही, 
       यह देश बड़ी हड़बड़ी में रहता है जिसका बच्चा 6 साल का है उसे भी तत्काल अपने बच्चे को आइएएस, डॉक्टर, इंजीनियर बनाना है वह पिछड़ न जाय इस लिए उसे इस बाजारू प्रतियोगिता में झोंक देना है, पहले बच्चे पढ़ते थे, अब प्राइवेट स्कूल ऐसा टेरर बनाते हैं कि बच्चे के साथ पूरी फैमिली पढ़ती है व इंगेज रहती है, पापा स्टेशनरी मार्ट पर चार्ट पेपर व कलर खरीद रहे मास्क लगाकर, मम्मी किचेन के स्लैब पर होमवर्क कर रही बच्चे की, बुआ जी उसकी फ़ाइल प्रीपेयर कर रही  दादा दादी तो खैर एक्सपायर्ड मोड़ के लोग तो बस अमेज होकर सकते में रहते हैं पोते पोती को बुलाकर जरा पुचकारे की मम्मी को टेंशन शुरू मम्मीजी आप प्लीज इसे डिस्टर्ब न करें वरना माइंड स्विंग हुआ तो स्टडी नही कर पायेगा।
   अब यह सारी कवायद केवल इसलिए है कि स्कूल खुल नही रहे तो गार्जियन फीस देने से कतराने न लगें सो पूरी तरह पढ़ाई जारी है।
    अब कई कई घण्टों तक फोन की स्क्रीन पर अटेंसन करने से बच्चों की आंख, ब्रेन, व स्नायु तंत्र पर क्या बुरा प्रभाव पड़ रहा इस पर भारत के सारे बड़बोले हेल्थ एक्सपर्ट चुप हैं, इसी कोरोना काल मे हर बच्चा पूरी तरह अपनी लाइफ का टारगेट एचीव कर लेगा, इस कोरोना में जो बचेगा वही कुछ एचीव करेगा,
     मजबूरी प्राइवेट स्कूल के टीचर्स की भी है स्कूल मालिक बोल दिए कि बच्चों को मोटिवेट कर क्लास चलाओ फीस उगाहो तो सैलरी पावो, वे पढें लिखे व्यवस्था के मारे मजबूर लोग लग गए हैं सैलरी बचाने व अपने परिवार की रोजी रोटी बचाने में
    भारत का सबसे होपफुल बिजनेस है प्राइवेट स्कूल सिस्टम सेटअप करना, न घाटा न कोई जोखिम, चमचमाती बिल्डिंग, हाई क्लास फर्नीचर, शिक्षित बेरिजगारी की मंडी में वेल क्वालिफाइड टीचर वह भी बेहद सस्ते दामो में
    आआख़िर स्कूल मालिक के स्कूल बिल्डिंग के चार कमरे चार साल में 16 कमरे कैसे होगये, और टीचर की सैलरी वही रह गयी इस पर बोलने को सरकार  चुप व्यवस्था मौन, आखिर जब फायदा स्कूल मालिक डकार रहे तो स्कूल बंद है तो अपनी बचत से सैलरी दें लेकिन इन बेचारे टीचर्स को सपोर्ट करने को कोई तैयार नहीं
     कोरोना के बाद इस देश के बच्चे कोरोना से भी बड़ी बीमारी से ग्रस्त होने वाले हैं-- खैर फिलहाल फीस भरिये बच्चो के फोन में डाटा भरिये-- बच्चे पढ़ रहे सो चुप रहिये