पुस्तक समीक्षा
April 23, 2020 • गुरुकुल वाणी

डॉ युवाल नोआ हरारी ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से इतिहास में पीएचडी हैं । वे हिब्रू विश्वविद्यालय में विश्व इतिहास के विशेषज्ञ हैं। उनकी पुस्तक "सेपियन्स : मानव जाति का एक संक्षिप्त इतिहास" धूम मचा रखी है। इस किताब ने विश्व भर में  प्रशंसक हासिल किये हैं। अब तक  ये किताब 50 से अधिक भाषाओं में प्रकाशित हो  चुकी है। प्राफेसर हरारी ने अपनी किताब और लेखों में खोजे गए विषयों पर दुनिया भर में व्याख्यान भी दिए हैं।

'सेपियन्स' में हरारी ने मानव जाति के संपूर्ण इतिहास को अनूठे परिप्रेक्ष्य में अत्यंत सजीव ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह प्रस्तुतिकरण अपने आप में अद्वितीय है। प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक युग तक मानव जाति के विकास की यात्रा के रोचक तथ्यों को लेखक ने शोध पर आधारित आँकडों के साथ खूबसूरती से  शब्दों में पिरोया है।

किताब में कुछ रोचक सवाल उठाए गए हैं। मसलन हरारी बताते हैं कि करीब 100,000 साल पहले धरती पर मानव की कम से कम छह प्रजातियाँ बसती थीं, लेकिन आज स़िर्फ हम (होमो सेपियन्स) हैं। फिर वे सवाल करते हैं कि, प्रभुत्व की इस जंग में आख़िर हमारी प्रजाति ने जीत कैसे हासिल की? हमारे भोजन खोजी पूर्वज शहरों और साम्राज्यों की स्थापना के लिए क्यों एकजुट हुए? कैसे हम ईश्वर, राष्ट्रों और मानवाधिकारों में विश्वास करने लगे? कैसे हम दौलत, किताबों और कानून में भरोसा करने लगे? कैसे हम नौकरशाही, समय-सारणी और उपभोक्तावाद के गुलाम बन गए? आने वाले हज़ार वर्षों में हमारी दुनिया कैसी होगी? वगैरह,वगैरह..

'सेपियन्स'  हरारी ने मानव जाति के रहस्यों से भरे इतिहास का विस्तार से वर्णन किया है। इसमें धरती पर विचरण करने वाले पहले इंसानों से लेकर संज्ञानात्मक, कृषि और वैज्ञानिक क्रांतियों की प्रारम्भिक खोजों से लेकर विनाशकारी परिणामों तक को शामिल किया गया है। अध्ययन की विभिन्न विधाओं जीव-विज्ञान, मानवशास्त्र, जीवाश्म विज्ञान और अर्थशास्त्र के आधार पर इस बात का अन्वेषण किया है कि इतिहास के प्रवाह ने आख़िर कैसे हमारे मानव समाज और जीव जगत  को आकार दिया। साथ ही इस बात पर भी प्रकाश डाला है कि इन सब बातों ने हमारे व्यक्तित्व को किस तरह रूपान्तरित किया।
*नीलिमा पांडेय*
के के सी लखनऊ