शराब की दुकानों के खुलने से बिगड़ सकता है लाँकडाउन में सामाजिक ताना बाना : सरफराज अन्सारी
May 7, 2020 • गुरुकुल वाणी

राष्ट्रहित और सामाजिक ताना बाना लॉकडाउन में ढील की प्रक्रिया में शराब के कारोबार खोले जाने के खिलाफ हैं।   सरकार ने लॉकडाउन के दौरान शराब की दुकानों को खोलने का फैसला किया है। हम इस फैसले से चिंतित हैं और इसका विरोध करते हैं क्योंकि देशभर में कोरोना महामारी का विस्तार अभी भी बढ़ रहा है। खबर के माध्यम से पता चलता है किइस फैसले के बाद कई जगहों पर ’सामाजिक-दूरी’ मानदंडों का उल्लंघन हुआ है और वायरस के प्रसार को नियंत्रित करने के प्रयासों में बाधा उत्पन्न हुई है। इसके अतिरिक्त शराब की वजह से घरेलू हिंसा में बढ़ोतरी का भी खतरा है। फिर यह कि शराब का इस्तेमाल करने से उन मामले में इज़ाफा हो सकता है जिसमें चिकित्सा उपचार की अधिक से अधिक आवश्यकता होती है या प्रशासन तंत्र को सक्रिय रहना पड़ता है। जबकि यह दोनों ही विभाग महामारी के कारण पहले ही से अत्यंत दबाव में हैं। इसलिए हम मांग करते हैं कि शराब की दुकान खोलने के फैसले को जल्द से जल्द वापस लिया जाए और शाराब पर पहले से लगी पाबंदी को बहाल रखा जाए। अगर सरकार देश की अर्थव्यवस्था को खोलना चाहती है तो अलकोहल का खुदरा कारोबार इसकी प्राथमिकता में नहीं होनी चाहिए। इसके विपरीत बुनयादी ज़रूरी सामानों जैसे बहुत से दूसरे व्यापार हैं जिन्हें चलाने की इजाज़त होनी चाहिए ताकि लोगों की कठिनाइयों को आसान किया जा सके।