वी रामास्वामी पेरियार का जन्मदिन पर विशेष -
September 18, 2020 • गुरुकुल वाणी

आज 17 जनवरी 1879 ई वी रामास्वामी पेरियार का जन्मदिन तमिलनाडु के  Erode जनपद की शुद्र समाज - गडरिया समुदाय मैं हुआ था जो पिछड़ों के सच्चे हितैषी ,व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से मुक्त दलितों पिछड़ों को  धार्मिक कुरीतियां आडंबर आडंबर एवं जातिगत शोषण से मुक्ति कराने के लिए समानता और भाईचारे का संदेश देने वाले और पिछड़ों की भागीदारी के लिए सतत आंदोलन करने वाले पेरियार  ई वी रामास्वामी  के जन्मदिन पर कुछ मुख्य बातें-

1 - उत्तर प्रदेश में 1904 मे काशी की यात्रा की धर्म ग्रंथों का अध्ययन किया और यहीं से अपनी तार्किक और बौद्धिक प्रवृत्ति के कारण नास्तिक होकर  तमिल नाडु वापस लौटे

2-  1919 में कांग्रेस में शामिल होने की बात रामास्वामी ने कांग्रेस से दलितों पिछड़ों की भागीदारी के लिए शिक्षा और नौकरी में आरक्षण की बात की, न मानने पर कांग्रेस से इस्तीफा देकर विरोध करते हुए , 🎂समाज में जागरूकता के लिए अपने को समर्पित कर दिया

3- 1924 में केरला में बैकोम आंदोलन चलाया जिसमें दलित और पिछड़ों को कहा -क्यों जाते हो मंदिर क्या रखा है मंदिरों में ,तुम्हारी इस दुर्दशा पर कभी भगवान ने कुछ किया है,  तुम लोग मत जाओ, स्कूल जाओ और शिक्षा से ही तुम्हारी भलाई होगी उसी से इस देश की धरती व्यवसाय शिक्षा में भागीदारी ले पाओगे

4 -1925 में पूरे दक्षिण भारत में पिछड़ों के लिए आत्मसम्मान- सेल्फ रिस्पेक्ट एवं स्वाभिमान के लिए गांव-गांव में आंदोलन चलाया धार्मिक आडंबर कुरीतियां अंधविश्वास एवं जातिगत शोषण को बिना जड़ से समाप्त किए  आत्मसम्मान  की बात करना नाइंसाफी है

5-  ई वी रामास्वामी पेरियार की उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश लखनऊ में शिवदयाल चौरसिया जी के नेतृत्व में पिछड़ा वर्ग सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रुप में  तीन बार लखनऊ आए थे इसी दौरान पेरियार ललई सिंह यादव से मुलाकात  हुई ललई सिंह ने रामास्वामी की अनुमति से उनकी किताब का हिंदी में रूपांतरण सच्ची रामायण के रूप में किया जिसने उत्तर भारत में एक भूचाल का कर दिया और दलित और पिछड़ों में जागृति के लिए ललई सिंह यादव हाई कोर्ट ही नहीं सुप्रीम कोर्ट तक गए और अंत में उनकी जीत हुई

6-1939 में रामास्वामी पेरियार ने जस्टिस पार्टी बनाई जिसके माध्यम से  अंधविश्वास धार्मिक कुरीतियां आडंबर को जड़ से समाप्त करना और जातिगत  शोषण से दलितों और पिछड़ों को जागरूक करना एवम मुक्त कराना महिलाओं के बराबरी के अधिकार के लिए आंदोलन करना और जब तक महिलाओं को समानता का अधिकार नहीं मिल जाता तब तक भारत का विकास नहीं हो सकता 1944 में जस्टिस पार्टी का नाम बदलकर डीएमके रख दिया और समाज में व्याप्त अंधविश्वास पाखंड धार्मिक रीति-रिवाजों का प्रखर तरीके विरोध किया और अपनी मानवतावादी बौद्धिक  तर्कों आधार पर जड़ से समाप्त करने के लिए दलितों और पिछड़ों को जागरूक करते करते  -24 दिसंबर 1973 को चिरस्थाई नींद में हमेशा हमेशा के लिए सो गए दक्षिण भारत ही नहीं उत्तर भारत का   पिछड़ा समाज, दलित समाज के  साथ-साथ  पाल गडरिया  समाज भी  विशेष रुप से भी पेरियार रामास्वामी को आज उनके जन्मदिन पर बार-बार नमन करता है इसके साथ साथ  आज 17 September के ही दिन  बौद्ध जगत की बहुत बड़े योद्धा  क्रांतिकारी  अनागरिक धम्मापाल  का भी जन्मदिन है  को भी  हम सभी बौद्ध जगत के लोग अनागरिक  धम्मपाल को कोटि-कोटि नमन  करते हैं जनहित में जागरूक समाज