विश्व आयुर्वेद परिषद द्वारा कोविड सैनिकों के लिए शिरीषामृतादि क्वाथ के वितरण एवं जन जागरूकता महाभियान का काशी से प्रारम्भ 
April 27, 2020 • गुरुकुल वाणी

काशी के प्रांत प्रचारक मा. रमेश जी के निर्देशन, *वैद्य कमलेश द्विवेदी, संपर्क प्रमुख,वि.आ.प के संरक्षण तथा वैद्य विजय राय, महासचिव, वि.आ.प. के नेतृत्व में आज दिनांक 27 अप्रैल 2020 को जिलाधिकारी, वाराणसी श्री कौशल राज शर्मा के द्वारा इस अभियान का शुभारंभ हुआ। संघ सम्पर्क प्रमुख श्री दीनदयाल जी, वैज्ञानिक सचिव डा.मनीष मिश्र तथा सक्रिय कार्यकर्ता प्रेम नारायण मिश्र जी ,अनुराग मिश्र चंदन जी (भाजपा )* की टीम ने वैश्विक आपदा कोविड-19 से निपटने मे आयुर्वेद की प्रमुख भूमिका पर  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा एवं आयुष मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों मे व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने हेतु अनुमोदित औषधियों से निर्मित  *शिरीषामृतादि क्वाथ*' का निर्माण किया है। इस क्वाथ को प्रथम चरण मे 10000 पैकेट की संख्या मे जनपद में अनवरत रूप से कार्यरत करोना वारियर्स, जिनमें मुख्यतः चिकित्सा, सुरक्षा, स्वच्छता संवर्ग के  कर्मचारियों के स्वास्थ्य उन्नयन हेतु औषधि वितरण के सन्दर्भ में जनपद वाराणसी के जिलाधिकारी से मुलाकात कर उन्हे परिषद के इस सेवा कार्य के विषय मे अवगत कराया गया। जिलाधिकारी महोदय ने इस सेवा कार्य की सराहना करते हुऐ, ऐसी रोगप्रतिरोधक क्षमता बढाने वाली औषधियों के सेवन को वर्तमान परिस्थितियों मे अतिआवश्यक बताया यथा इसके निर्माण मे पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया । इस क्वाथ मे शिरीष, अमृता (गुडुची), सोंठ, तुलसी, धनिया, श्लेषमान्तक (लिसोढा), मुलैठी, अडूसा (वासा), भूम्यामलकी तथा नागरमोथा जैसी औषधियों का समावेश है । यह औषधि व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाने के साथ-साथ करोना जैसी वायरल व्याधि की प्रारंभिक अवस्था के लक्षणों  ज्वर, थकान, शरीर दर्द तथा कास (खांसी) मे भी कारगर है।
इस औषधीय क्वाथ को एक चम्मच की मात्रा मे दो कप जल मे डालकर एक कप शेष रहने तक उबालना है। पश्चात छानकर स्वादानुसार मात्रा मे गुड़ या खाण्ड या चीनी या सैंधव लवण मिलाकर छानकर  प्रातः एवं सायं काल दो बार सेवन करना है। मधुमेह अथवा हृदय रोगी इसे बिना चीनी और नमक के सेवन कर सकते हैं। 

मा. रमेश जी ने  अन्य जनपदों में भी इस कार्य को शुरू कराने के लिए  प्रयास करने तथा साथ ही अन्य सेवाभावी संगठनों से सहयोग लेने पर बल दिया।

शिवाकान्‍त तिवारी की रिपोर्ट